मीमांसा दर्शन सूत्र 3.5.31–40 हिन्दी-अंग्रेज़ी व्याख्या
मीमांसा दर्शन – अध्याय 3.5.31–40
हिन्दी एवं English Explanation
३.५.३१ — वषट्काराच् च भक्षयेत्
हिन्दी: वषट्कार (यज्ञ की एक क्रिया) में भी भक्षण (अर्पित भोजन) किया जाता है।
English: Even in Vashatkāra, consumption or offering (Bhaksh) is performed.
३.५.३२ — होमाभिषबाभ्यां च
हिन्दी: होम और अभिषेक दोनों में भी भक्षण या अर्पण की व्यवस्था है।
English: In both Homa and Abhisheka, offerings or consumption are included.
३.५.३३ — प्रत्यक्षोपदेशाच् चमसानाम् अव्यक्तः शेषे
हिन्दी: चमसों के लिए प्रत्यक्ष निर्देशानुसार शेष कर्म का उल्लेख नहीं होता।
English: For Chamas, direct instructions indicate no explicit mention of remaining acts.
३.५.३४ — स्याद् वा कारणभावाद् अनिर्देशश् चमसानां कर्तुस् तद्वचनत्वात्
हिन्दी: कारण और वचन के अनुसार, चमसों को करने वाला अनिर्दिष्ट रहता है।
English: Due to causal and verbal reference, the doer of Chamas remains unspecified.
३.५.३५ — चमसे चान्यदर्शनात्
हिन्दी: चमस में अन्य कर्मों के दृष्टांत से भक्षण का संकेत मिलता है।
English: In Chamas, the act of offering is inferred from other instances.
३.५.३६ — एकपात्रे क्रमाद् अध्वर्युः पूर्वो भक्षयेत्
हिन्दी: यदि एक पात्र में कई कर्म हों, तो अध्वर्य (पूर्व कर्म) पहले भक्षण किया जाता है।
English: When multiple acts occur in one vessel, the prior act (Adhvarya) is consumed first.
३.५.३७ — होता वा मन्त्रवर्णात्
हिन्दी: होता (यज्ञकर्ता) मन्त्र के वर्णानुसार क्रियाओं का पालन करता है।
English: The Hota performs acts according to the letters of the mantra.
३.५.३८ — वचनाच् च
हिन्दी: वचनानुसार भी कर्मों का पालन सुनिश्चित होता है।
English: Acts are also ensured according to the statements (Vachana).
३.५.३९ — कारणानुपूर्व्याच् च
हिन्दी: कर्म कारणानुपूर्वक (किसी कारण के अनुसार) व्यवस्थित किए जाते हैं।
English: Acts are arranged following the order of causation.
३.५.४० — वचनाद् अनुज्ञातभक्षणम्
हिन्दी: वचनानुसार (Shruti/Mantra) भक्षण का अनुज्ञात क्रियान्वयन होता है।
English: Consumption is permitted and executed according to the verbal instructions.
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