मनुष्य का मानशिक पतन फायदे और नुकसान


 मनुष्य के मानशिक पतन के फायदे और नुकसान 

पहले उन कारणो को समझते हैं कि मनुष्य का मानशिक पतन के कारण क्या हैं, फिर उसके फायदे और नुकसान पर विचार करेगे|

    मनुष्य का मानशिक पतन क्या होता है। 

   हम कैसे पहचान सकते हैं की मनुष्य का मानशिक पतन हो चुका है। जिस मनुष्य का मानशिक पतन हो चुका होगा उसकी पहली पहचान है, कि वह किसी मर्यादा का पालन नहीं करता होगा, किसी मर्यादा का पालन करना एक तो स्वत: अपने विवेक से करते हैं,  दुसरा उनसे जबरदस्ती कराया जाता है, एक संस्कारी परिवार का व्यक्ति मर्यादा में अपना जीवन व्यतित करता है। यहां संस्कारी परिवार का मतलब है कि ऐसे माता पिता जो अपनी बुद्धि विवेक से अपनी जिंदगी को जीते हैं और अपने बच्चों को भी बुद्धि विवेक से जिने के लिए प्रेरित करते हैं,  वह अपनी मर्यादा को जानते हैं अर्थात वह अपने परिवार समाज में सभी के साथ यथा योग्य व्यवहार करते हैं,  दुसरा परिवार का कोई व्यक्ति यदि उच्छृंखल हो गया है, तो उसे तरह तरह से विचार करके उसे सही मार्ग पर लाते हैं,  जैसे एक कक्षा में बहुत सारे बच्चे होते हैं कुछ बच्चे अध्ययन करने रुची दिखालाते है और कुछ ऐसे बच्चे भी होते है जो कक्षा में जब अध्यापक पढ़ा रहा होता है तो वह अध्ययन पर ध्यान नहीं देते  हैं यद्यपि वह पुरी कक्षा में  जो अध्ययन का कार्य अध्यापक के द्वारा कराया जा रहा है उसमें बिघ्न उपस्थित करते हैं,  तो अध्यापक उसको किसी भी तरह से नियंत्रित करता है, और कहता है की कक्षा की मर्यादा को बना के रखो अंयथा हमारी कक्षा से बाहर चले जाओ यदि अध्यापक बुद्धिमान विवेकशील है तो और यदि वह अध्यापक मंदबुद्धि बच्चों से डरता है, या बच्चों के अभिवावक से डरता है, तो वह अपना समय किसी तरह से व्यतित कर के कक्षा से बाहर आ जायेगा, यहां बच्चों  के साथ अध्यापक दोनो को अपनी मर्यादा का ज्ञान होना आवश्यक है, ऐसा नहीं होने पर अध्यापक और बच्चे दोनों का मानशिक पतन होना अनिवार्य है। ऐसा ही परिवार समाज में भी होता है, जब परिवार या समाज में मर्यादा का ध्यान दिया जाता है तो उस परिवार या समाज का चतुर्मुखी विकास होता है। ऐसा ना होने पर केवल एक तरफा विकास होता एन केन प्रकारेण अर्थात किसी भी प्रकार से धनार्जन को ही जीवन की मुख्यधुरी बना रखा है, जैसा की आज हो रहा है। लोगो क मानसिक पतन हो चुका है,  लोग अपने जीवन की उच्छृंखलता के कारण धन तो बहुत कमाते हैं फिर भी उनकी कंगाली दुर नहीं होती हैं,  आज लोग धनी दरिद्र है, क्योंकि लोगों का मानशिक पतन हो चुका है। लोग जीवितमृत है, यह सब लोगों के मानशिक पतन के कारण है, लोगो को मर्यादा में रखने के लिए ही, सरकार है कानून है, जेल है, इतना सबकुछ होने पर भी लोग मर्यादित जीवन नही जीते हैं,  जब लोग मर्यादा में जियेगे तो समाज में अपराध कम होंगे लोगो का मानशिक उत्थान होगा, सारे जो चोर बाजारी के धंधे हैं वह बंद हो जायेगे, समाज या परिवार की परंपरा जो जर्जित हो कर नष्ट हो चुकी है। यह मनुष्य के मानशिक पतन के करण ही है। 

   मानशिक पतन दुनिया को खत्य कर रहा है। आज इस दुनिया मैं ९९ % लोगों का मानशिक पतन हो चुका है। जिसका परिणाम यह है कि यह दुनिया बड़ी तिव्रता से समाप्त हो रही है, केवल १ % लोगों ने ईस दुनिया को किसी तरह से जीवीत रख रख्खा है, यह जो एक प्रतिशत लोग हैं वह मर्यादा में जीवन जीते हैं जिसके कारण उनका मानशिक उत्थान होरहा है, यह लोग तपस्वी  है जिन्होंने अपने जीवन को ईश्वर को समर्पित कर रखा है। यह लोग ऋषि महर्षि है, यह लोग धर्मात्मा है, जिनके शर्वनास के लिए यह सभी जिनका मानशिक पतन हो चुका है, लगे हैं, मानशिक पतन दुनिया क खत्म कर देगा इसे कोई भी नहीं बचा पायेगा, मानशिक उत्थान इस दुनिया को वास्तव में स्वर्ग बना देगा, इस तरह से स्वर्ग और नरक एक मानशिक अवस्था है। 

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