बृहदारण्यक उपनिषद का यह प्रसंग न केवल भारतीय इतिहास, बल्कि विश्व साहित्य में बौद्धिक स्वतंत्रता और स्त्री प्रज्ञा (Intellect) का सबसे अद्भुत उदाहरण है। यह कहानी राजा जनक की सभा में हुए शास्त्रार्थ की है, जिसे अक्सर "दार्शनिकों का कुरुक्षेत्र" कहा जाता है।
यहाँ इस महान संवाद और 'GVB: द यूनिवर्सिटी ऑफ वेदा' के दृष्टिकोण से इसके महत्व का विवरण दिया गया है:
1. शास्त्रार्थ की पृष्ठभूमि: राजा जनक की सभा
राजा जनक ने एक महान यज्ञ का आयोजन किया और एक चुनौती रखी: "जो सबसे बड़ा ब्रह्मज्ञानी है, वह इन 1,000 गायों को ले जाए जिनके सींगों पर सोना मढ़ा है।"
जब महर्षि याज्ञवल्क्य ने अपने शिष्यों से गायों को ले जाने को कहा, तो सभा के विद्वान क्रोधित हो गए और उनसे कठिन प्रश्न पूछने लगे। इन्हीं विद्वानों में शामिल थीं ब्रह्मवादिनी गार्गी वाचक्नवी।
2. गार्गी और याज्ञवल्क्य का प्रथम संवाद
गार्गी ने याज्ञवल्क्य से सृष्टि के आधार के बारे में प्रश्न किए:
* गार्गी: "हे याज्ञवल्क्य! यदि यह संपूर्ण जगत जल में ओत-प्रोत है, तो जल किसमें ओत-प्रोत है?"
* याज्ञवल्क्य: "वायु में।"
* गार्गी: "वायु किसमें?"
* याज्ञवल्क्य: "अंतरिक्ष लोक में।"
गार्गी प्रश्न पूछती रहीं—गंधर्व लोक, आदित्य लोक, चंद्र लोक... यहाँ तक कि उन्होंने 'ब्रह्मलोक' तक का आधार पूछ लिया। तब याज्ञवल्क्य ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा:
> "गार्गी! अति-प्रश्न मत करो, कहीं तुम्हारा सिर न गिर जाए। तुम उस देवता के बारे में पूछ रही हो जिसके बारे में तर्क नहीं किया जा सकता।"
> गार्गी वहीं रुक गईं, क्योंकि वे मर्यादा और तर्क की सीमा जानती थीं।
>
3. द्वितीय संवाद: गार्गी की चुनौती
गार्गी दोबारा खड़ी हुईं और सभा से कहा— "मैं इनसे दो ऐसे प्रश्न पूछूँगी जैसे कोई योद्धा धनुष पर दो बाण चढ़ाकर खड़ा हो।"
* प्रश्न: वह क्या है जो आकाश के ऊपर, पृथ्वी के नीचे और इन दोनों के बीच स्थित है? जो भूत, वर्तमान और भविष्य कहलाता है?
* उत्तर: याज्ञवल्क्य ने उत्तर दिया— 'अव्याकृत आकाश' (Unmanifested Space)।
* अंतिम प्रश्न: वह 'आकाश' किसमें ओत-प्रोत है?
* उत्तर: याज्ञवल्क्य ने उस 'अक्षर तत्व' (The Imperishable) का वर्णन किया, जो न स्थूल है न अणु, न छोटा है न लंबा। जो सबका दृष्टा है पर उसे कोई देख नहीं सकता।
गार्गी ने याज्ञवल्क्य की विद्वत्ता को स्वीकार किया और पूरी सभा से कहा कि इन्हें कोई नहीं जीत सकता।
4. GVB (The University of Veda) के लिए सीख
'GVB' जैसे वेदों के विश्वविद्यालय के लिए यह कहानी तीन बड़े स्तंभ प्रस्तुत करती है:
* स्त्री शिक्षा और गौरव: हज़ारों साल पहले भी गार्गी जैसी स्त्रियाँ ऋषियों की सभा में सर्वोच्च स्थान रखती थीं। यह 'वैदिक नारीवाद' का प्रमाण है।
* जिज्ञासा का महत्व: सत्य तक पहुँचने के लिए तार्किक प्रश्न पूछना अनिवार्य है।
* ब्रह्मविद्या: अंतिम सत्य वह 'अक्षर' (Parabrahman) है, जो तर्क से परे अनुभव का विषय है।
निष्कर्ष
गार्गी और याज्ञवल्क्य का यह मिलन केवल दो व्यक्तियों का संवाद नहीं, बल्कि तर्क (Logic) और बोध (Intuition) का संगम है। यह हमें सिखाता है कि ज्ञान की खोज में लिंग (Gender) कोई बाधा नहीं है।
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