धन की सार्थकता

 

धन की सार्थकता

एक बार देवराज इंद्र आचार्य बृहस्पति के सत्संग के लिए पहुंचे। वहाँ देवी लक्ष्मी की महिमा की चर्चा होने लगी । आचार्य बृहस्पति ने कहा, माँ लक्ष्मी जिस पर कृपा करती हैं, वह धनवान और समृद्ध बन जाता है, किंतु यह ध्यान रखना चाहिए कि धन- संपत्ति का उपयोग सदैव सद्कार्यों के लिए करना चाहिए । यदि धन- संपत्ति का गलत तरीके से उपयोग किया जाता है, तो कुछ ही समय में व्यक्ति धनपति से कंगाल बन जाता है।

देवराज इंद्र ने पूछा, आचार्यश्री, धनाढ्य को किन -किन सद्कार्यों पर धन का उपयोग करना चाहिए? आचार्य बृहस्पति ने बताया, लोकोपकार के कार्यों पर धन खर्च करना ही उसका सदुपयोग है । जल का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्त्व है । अतः जो व्यक्ति कुएँ खुदवाता है, बावड़ी-तालाब बनवाता है और बाग- बगीचों का जीर्णोद्धार करता है, वह न सिर्फ इस लोक में, बल्कि स्वर्गलोक में भी प्रतिष्ठित होता है ।

__ आचार्यश्री ने आगे कहा, धर्मशाला, देवालय, विद्यालय, अनाथालय, चिकित्सालय जैसे लोकोपकारी कार्यों में धन खर्च करने वाले को अनेक यज्ञों और उपासना का पुण्य प्राप्त होता है । वृक्ष लगाने वाले की कीर्ति भी लोक परलोक में बनी रहती है । चूंकि वृक्ष अपने फूलों से देवताओं को, फलों से पितरों, निरीह पशु- पक्षियों और रोगियों को तृप्त करते हैं तथा अपनी छाया से यात्रियों की सेवा करते हैं और वातावरण को सुखद बनाते हैं, अतः पौधारोपण पर खर्च किया गया धन सार्थक और पुण्यदायक है ।


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