जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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मुमताज काजी एशिया की पहली डीजल इंजन ट्रेन ड्राइवर

 


मुमताज काजी एशिया की पहली डीजल इंजन ट्रेन ड्राइवर मुझे पता है कोई बधाई नहीं देगा क्योंकि मुस्लिम है ना 🙏मुमताज़ काज़ी पटरी पर ट्रेनों को चलाने वाली एक ऐसी महिला जो हौसले और जुनून का प्रतीक बन चुकी हैं। एक समय था जब इंजन हांकना केवल पुरुषों का काम समझा जाता था, लेकिन मुमताज़ ने इस सोच को न केवल चुनौती दी बल्कि उसे पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने न केवल अपने लिए एक अलग पहचान बनाई, बल्कि समाज के सामने एक मिसाल भी कायम की।

1991 में मात्र 20 साल की उम्र में, मुमताज़ ने ट्रेन चलाने का सफर शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। 1995 में, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने उन्हें एशिया की पहली महिला लोकोमोटिव ड्राइवर के रूप में मान्यता दी। यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन मुमताज़ ने यहीं रुकने का नाम नहीं लिया। 2005 में, उन्हें सेकंड मोटरवुमन बनाया गया, जो उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम था।

मुमताज़ की कहानी हमें यह सिखाती है कि सपने देखना और उन्हें पूरा करना सिर्फ एक इच्छा नहीं, बल्कि एक अधिकार है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आप अपने सपनों को पूरा करने के लिए दृढ़ निश्चय कर लें, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। उनकी सफलता यह भी बताती है कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता और जुनून के साथ किया गया हर काम अपने लक्ष्य तक जरूर पहुंचता है।

मुमताज़ काज़ी का जीवन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने दिखाया कि हर व्यक्ति अपने सपनों को पूरा कर सकता है, बस हौसले और लगन की जरूरत है। वे सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो कामयाबी की ऊंचाइयों को छूने की चाह रखती हैं। 🌟

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