🚩‼️ओ३म्‼️🚩



🕉️🙏नमस्ते जी🙏


दिनांक  - - १० जनवरी  २०२५ ईस्वी 


दिन  - - शुक्रवार 


  🌔 तिथि --  एकादशी ( १०:१९ तक तत्पश्चात द्वादशी )


🪐 नक्षत्र - - कृत्तिका ( १३:४५ तक तत्पश्चात  रोहिणी)

 

पक्ष  - -  शुक्ल 

मास  - -  पौष 

ऋतु - - हेमन्त 

सूर्य  - - उत्तरायण 


🌞 सूर्योदय  - - प्रातः ७:१५ पर  दिल्ली में 

🌞 सूर्यास्त  - - सायं १७:४२ पर 

 🌓 चन्द्रोदय  --  १४:०६ पर 

  🌓चन्द्रास्त २८:४७ पर 


 सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२५

कलयुगाब्द  - - ५१२५

विक्रम संवत्  - -२०८१

शक संवत्  - - १९४६

दयानंदाब्द  - - २००


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 🚩‼️ओ३म्‼️🚩


🔥धर्म निरपेक्षता का अर्थ धर्म नपुसंकता नही।

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    हमारी प्राचीन संस्कृति एवं मनुष्य धर्म पूर्णतया वेदों पर आधारित है। वेद सब सत्य विद्याओं का संकलन है। वेद ज्ञान सम्पूर्ण सृष्टि के लिए, सभी जाति वर्ग, समाज के लिए है, प्राणी मात्र के लिए सभी काल में समान रूप से उपयोगी, लाभकारी है। यह वेद ज्ञान केवल आर्यों या भारत वासियों को ही लाभ नहीं देता, वेद ज्ञान व्यक्तिगत, समाज और राष्ट्र हित और निर्माण की बात करता है। सर्वे भवन्तु सुखीन: और वसुधैव कुटुंबकम का उदघोष करता है। दुसरी तरफ अलगाववाद, ईसाइयत, इस्लामिक स्टेट की बातें होती हैं। जबरदस्ती धर्मांतरण के कृतय किये जाते हैं। पिछले आठ सौ वर्षों से भारत में यही कुछ हो रहा है। आज भी धर्म मज़हब के नाम पर जेहाद, लव जेहाद, और आतंक हावी हो रहा है। 


         ' सत्यं वृहदतयुग्रं दीक्षा तपोब्रहा यज्ञ: पृथिवीं धारयन्ति ' - अथर्ववेद। मै मानव धर्म में सत्य, ज्ञान,तप, दक्षता, ईश्वर और यज्ञ (परोपकार) की बात कही है। वेदों में कहीं जाति, व्यक्ति, स्थान, काल विशेष की बात नही है। फिर इन सिद्धान्तों के अनुरूप शासन व्यवस्था को बनाए रखने या चलाने वालों को साम्प्रदायिक ताकतें कह देना या भगवाकरण कह कर विरोध करना आज के अर्द्धशिक्षित और अल्प ज्ञानी तथाकथित नेताओं की बचकानी बातें नहीं तो और क्या है। 


        वोटों की राजनीति में कट्टरपंथी और अलगाववादियों को बेचारे अल्पसंख्यक कसकर धर्मनिरपेक्षता का झूठा ढिंढोरा पीटना क्या सच्ची राष्ट्र भक्ति है।यदि सब को साथ लेकर चलने वाली वैदिक संस्कृति पर राजनीति और विरोध होता है तो इसे धर्म नपुसंकता ही कहेंगे।धर्म निरपेक्षताका मतलब तो सभी धर्मों केअच्छे विचारों का आदर करना होता है। सत्य सनातन वैदिक विचारों का विरोध नहीं। 


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🕉️🚩आज का वेद मंत्र 🚩🕉️


🌷ओ३म् येभ्यो होत्रां प्रथमामायेजे मनु: समिद्धाग्निर्मनसा सप्त होतृभि:।त आदित्या अभयं शर्म यच्छत सुगा न: कर्त्त सुपथा स्वस्तये। (१०|६३|७)


💐अर्थ  :- जिन विद्वानों के लिए अग्नि, सूर्य आदि तेज के प्रकाशक ज्ञानवान परमेश्वर ने मन के साथ तथा सात यज्ञों को करने वाले, वरने योग्य वेदवाणी को यथविधि यथाविधि दिया था, उस भजनीय परमैश्वर्यवान् परमात्मा का हम कल्याण के लिए आह्वान करते हैं। 


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 🔥विश्व के एकमात्र वैदिक  पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

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 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏


(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त)       🔮🚨💧🚨 🔮


ओ३म् तत्सत् श्री ब्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- पञ्चर्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२५ ) सृष्ट्यब्दे】【 एकाशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८१) वैक्रमाब्दे 】 【 द्विशतीतमे ( २००) दयानन्दाब्दे, काल -संवत्सरे,  रवि- उत्तरायणे , हेमन्त -ऋतौ, पौष - मासे, शुक्ल पक्षे, एकादश्यां

 तिथौ, 

  कृत्तिका नक्षत्रे, शुक्रवासरे

 , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर गते, भारतवर्षे भरतखंडे...प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ,  आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे


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