मकर संक्रान्ति

 ‼️🚩ओ३म्‼️🚩



🕉️🙏नमस्ते जी🙏


दिनांक  - - १४ जनवरी  २०२५ ईस्वी 


दिन  - - मंगलवार 


  🌖 तिथि -- प्रतिपदा ( २७:२१ तक तत्पश्चात  द्वितीया )


🪐 नक्षत्र - - पुनर्वसु ( १०:१७ तक तत्पश्चात  पुष्य  )

 

पक्ष  - -  कृष्ण 

मास  - -  माघ 

ऋतु - - शिशिर 

सूर्य  - - उत्तरायण 


🌞 सूर्योदय  - - प्रातः ७:१५ पर  दिल्ली में 

🌞 सूर्यास्त  - - सायं १७:४६ पर 

 🌖 चन्द्रोदय  --  १७:०४ पर 

  🌖चन्द्रास्त नही होगा


 सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२५

कलयुगाब्द  - - ५१२५

विक्रम संवत्  - -२०८१

शक संवत्  - - १९४६

दयानंदाब्द  - - २००


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 🚩‼️ओ३म्‼️🚩


  🔥 मकर संक्रान्ति 

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   मकर संक्रान्ति हिन्दूओं का प्रमुख पर्व है।  मकर संक्रान्ति पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तब इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्यौहार जनवरी माह के चौदहवे या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता हैं। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। 


     मकर संक्रान्ति उत्तरायण से भिन्न हैं मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं, यह भ्रान्ति गलत है कि उत्तरायण भी मकर संक्रान्ति को ही होता है।उत्तरायण का प्रारंभ २१  दिसम्बर को ही हो जाता है। 


उत्तरायण और दक्षिणायन 


  सूर्य की एक दशा है उत्तरायण  ( उत्तर + अयन ) का शाब्दिक अर्थ है उत्तर में गमन। उत्तरायण में सूर्य उत्तर की ओर बढ़ता हैं उत्तरायण की दशा में पृथ्वी के  उत्तरी गोलार्ध में दिन लम्बे ओर रातें छोटी होने लगती हैं। 

     

        उत्तरायण का आरम्भ २१  दिसम्बर को  होता है। यह दशा  २१ जून तक चलती है। २१ जून को दक्षिणायन होता है। 


    उत्तरायण और दक्षिणायन को समझने के लिए उत्तर और दक्षिण को समझना होगा। सूर्य से कुछ तय न करें क्योंकि वह हर रोज न तो पूर्व से उगता है और न पश्चिम में डूबता है।वह ऐसा केवल दो दिन में ही करता है  - २१ मार्च और २१ सितम्बर । २१ मार्च और २१ सितम्बर को दिन और रात बराबर होते हैं। 


  २१ मार्च के बाद सूर्य रोज़ धीरे धीरे पूर्व से खिसक कर उत्तर की ओर बढ़ता  जाता है, याने यह केवल पूर्व में  न  उग कर थोड़ा- थोड़ा उत्तर- पूर्व में उगता है। ऐसाकरते करते २१ जून आ जाता है, २१ जून को सूर्य सबसे अधिक पूर्वोत्तर में उगता है। फिर यह वापस पूर्व की ओर लौटना शुरू करता है। इसी को दक्षिणायन कहते है। दक्षिणायन यानि जब सूर्योदय दक्षिण की ओर बढने लगे।


   २१ सितम्बर को सूर्य वापस ठोक पूर्व में उगता है और उसके बाद दक्षिण की ओर उगना शुरू कर देता है। हर दिन वह थोड़ा दक्षिण पूर्व में उगता हुआ दिखाई देता है। ऐसा करते करते २१ दिसम्बर आ जाता है उस दिन सूर्य सर्वाधिक दक्षिण- पूर्व में उगा  होता है। फिर अगले दिन से वह वापस पूर्व की ओर लौटने लगता है इसी को उत्तरायण कहते है।


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💐🙏आज का वेद मंत्र 💐🙏


🌷 ओ३म् ये देवानां यज्ञिया यज्ञियानां मनोर्यजत्रा अमृता ऋतज्ञा:। ते नो रासन्तामुरूगायमद्य यूयं पात स्वस्तिभि: सदा न:।(ऋग्वेद ७|३५|१५)


💐अर्थ  :- पूजनीय विद्वान्, यज्ञमय जीवन वाले ज्ञानी, यशस्वी देव जन, धर्म के जानने हारे हमको उत्तम ज्ञान का उपदेश करें। हे देवों ! आप अनेक सुखों द्वारा सदा हमारी रक्षा करें। 


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 🔥विश्व के एकमात्र वैदिक  पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

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 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏


(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त)       🔮🚨💧🚨 🔮


ओ३म् तत्सत् श्री ब्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- पञ्चर्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२५ ) सृष्ट्यब्दे】【 एकाशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८१) वैक्रमाब्दे 】 【 द्विशतीतमे ( २००) दयानन्दाब्दे, काल -संवत्सरे,  रवि- उत्तरायणे , शिशिर -ऋतौ, माघ - मासे, कृष्ण पक्षे, प्रतिपदायां

 तिथौ, 

  पुनर्वसु नक्षत्रे,मंगलवासरे

 , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर गते, भारतवर्षे भरतखंडे...प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ,  आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे


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