मृत्यु का जश्न
राम का सम्राट किसी बात पर अपने मंत्री से क्षुब्ध हो उठा । उसे लगा कि
मंत्री भगवान् को मुझसे बड़ा मानकर मेरा निरादर कर रहा है । राजा के मन में
ईर्ष्या की भावना इतनी प्रबल हो उठी कि उसने निर्णय लिया कि जब मंत्री अपने परिवार
के साथ अपना जन्मदिन मनाएगा, उसी दिन उसे फाँसी दे दी जाएगी ।
___ मंत्री के जन्मदिवस पर भजन - संगीत और भोज का आयोजन था । तमाम
रिश्तेदार व मित्र उपस्थित थे। उसी समय राजा के दूत ने एक लिखित आदेश मंत्री को
थमा दिया । उसमें लिखा था, आज शाम छह बजे मंत्री को फाँसी दी जाएगी । यह आदेश पढ़ते ही मंत्री के
कुटुंबी और मित्र हतप्रभ रह गए । पत्नी और बेटे रोने लगे, किंतु मंत्री उठा और मस्ती में भगवान् का
स्मरण कर नाचने लगा ।
दूत यह देखकर दंग रह गया । उसने राजा को बताया कि फाँसी का आदेश मिलने पर भी
मंत्री मायूस न होकर खुशी- खुशी नाच रहा है । राजा भी वहाँ पहुँचा। उसने मंत्री से
पूछा, क्या तुम्हें नहीं
पता कि कुछ घंटे बाद तुम्हें फाँसी पर लटका दिया जाएगा ?
__ मंत्री ने कहा, राजन् , मैं आपके
प्रति कृतज्ञ हूँ । मैं आज के दिन ही जन्मा था । आपकी कृपा से आज ही इस नश्वर शरीर
को छोड़ प्रभु में विलीन हो जाऊँगा । आज तमाम रिश्तेदार -मित्र यहाँ मौजूद हैं ।
मेरी मृत्यु को आनंद महोत्सव में बदलकर आपने मुझ पर एक बड़ा एहसान किया है । राजा
ने कहा , तुमने तो
मृत्यु को जीत लिया है । जिसे मृत्यु का भय नहीं सताए, वही तो जीवित है । राजा ने मंत्री की फाँसी की
सजा टाल दी ।

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