दानव भस्म हो गए

 

दानव भस्म हो गए

एक बार मानसरोवर के तट पर देवताओं ने लोक कल्याण के उद्देश्य से विशालयज्ञ का आयोजन किया । इस क्षेत्र में खली नामक दानवों का आतंक था । अपने स्वभाव के अनुरूप वे सद्कर्मों में विघ्न डालते रहते थे। उनके उत्पात से बचने के लिए शांतिप्रिय लोग दूर - दराज के वनों में छिप जाते थे ।

दानवों को जब देवताओं द्वारा किए जा रहे यज्ञ का पता चला, तो वे यज्ञस्थल पर पहुँचकर भीषण उपद्रव मचाने लगे । देवराज इंद्र को जब यह सूचना मिली, तो वह सेना लेकर यज्ञ की रक्षा करने पहुँच गए, लेकिन दस हजार दानवों ने इंद्र की सेना को भी भागने के लिए विवश कर दिया । कुछ दानवों ने यज्ञ के लिए घृत आदि सामग्री पहुँचाने वाली ग्रामीण महिलाओं को अचानक घेर लिया और उनसे दुर्व्यवहार करने लगे । चारों ओर हाहाकार मच गया । आश्रमों से बाहर निकलकर ऋषियों ने कहा, दुष्ट दानव, महिलाएँ साक्षात् देवी स्वरूपा होती हैं । इनसे दुर्व्यवहार और कदाचार करने पर समझ लो कि तुम्हारे पापों का घड़ा भरने वाला है ।

दानवों ने ऋषियों की बात अनसुनी कर उनके आश्रमों में भी उत्पात मचाना शुरू कर दिया । देवतागण तुरंत मुनि वशिष्ठ की शरण में गए । मुनि ने जब दानवों की करतूत सुनी, तो उन्होंने कहा, अब इन दानवों के पापों का घड़ा सचमुच भर चुका है । वे तुरंत मानसरोवर तट पर पहुँचे। उनके तेज से तमाम दानव भस्म हो गए । यह देखकर सभी देवताओं ने राहत की साँस ली । 

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