एक दिलचस्प कहानी
एक समय की बात है, एक संत जंगल में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। एक दिन सुबह वे नदी में प्रार्थना कर रहे थे। जब उन्होंने पानी को अपने हाथों में लिया, तो अचानक एक सुंदर चूही उनके हाथों में आ गिरी। संत ने उसे बड़ी दया से देखा। दरअसल, एक चील उसके पंजे पकड़ने के लिए उड़ रही थी। संयोग से, चूही चील के पंजों से फिसलकर संत के हाथों में आ गिरी। संत उसे अपने घर ले आए। संत की पत्नी चूहे को देखकर बहुत प्रसन्न हुई। दरअसल, उनके कोई संतान नहीं थी। चूही संत की कुटिया में बड़े सुख से रह रही थी। एक दिन संत की पत्नी ने संत से कहा, "हमारी कोई संतान नहीं है, आप इस चूहे को लड़की क्यों नहीं बना देते?" संत ने कहा, "आप सही कह रही हैं।" और संत ने चूहे को लड़की में बदल दिया। इसके बाद सोलह वर्ष बीत गए और लड़की एक सुंदर युवती बन गई। अब संत उस लड़की के विवाह के बारे में सोच रहे थे। क्योंकि वह उनकी प्यारी बेटी थी, इसलिए वे उसका विवाह एक शक्तिशाली पुरुष से करवाना चाहते थे। वह पुरुष उनके पुत्र का भक्त था। तो वह सबसे पहले अपने पुत्र के पास गया और उससे विनती की कि मैं अपनी पुत्री का विवाह आपसे करना चाहता हूँ। पुत्र ने पूछा, “क्यों?” ऋषि ने उत्तर दिया, “क्योंकि तुम संसार के सबसे शक्तिशाली राजा हो और मेरी पुत्री पृथ्वी की सबसे सुंदर कन्या है।” पुत्र ने कहा, “हे ऋषि, आप सही कह रहे हैं, लेकिन मुझे खेद है, मैं आपकी पुत्री को अपनी वर नहीं बना सकता, क्योंकि काला बादल मुझसे अधिक शक्तिशाली है। मेरे विचार से काला बादल आपकी पुत्री के योग्य है।” ऋषि काले बादल के पास गए और कहा, “पुत्र कह रहा है कि तुम संसार के सबसे शक्तिशाली हो।”
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