जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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मानव कल्याण के तीन मार्ग

🙏मानव कल्याण के तीन मार्ग🙏


तीन प्रकार से हम अपने समाज के जीवन के स्तर को उंचा उठा सकते हैं। यहीं मानव कल्याण हैं

 

ज्ञान विज्ञान ब्रह्मज्ञान वैदिक विश्वविद्यालय का उद्देश्य है, मानव का कल्याण


 मानव का कल्याण कुल तीन प्रकार से किया जा सकता है,

 

प्रथम व्यक्तिगत रूप से मानव को लाभ पहुंचाया जाए।


दूसरा सामाजिक रूप से मानव को लाभ पहुंचाया जाए।


तीसरा आध्यात्मिक रूप से मानव को लाभ पहुंचाया जाए।


 1.    व्यक्तिगत रूप से हम किसी भी मानव की यथा संभव सहायता कर सकते हैं, तन से धन से और ज्ञान अर्थात किसी को हमारी शरीर की जरूरत है, हमारे शरीर के अंगों को, हम दान कर सकते है, अपने मरने के बाद, दूसरा हम किसी मानव की धन से सहायता कर सकते है, अर्थात किसी को अच्छी शिक्षा को प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध करा सकते हैं, तीसरा किसी बेसहारा को रहने के लिए खाने की व्यवस्था कर सकते हैं, या फिर किसी को हम यदि संपन्न हैं, तो उसको कोई छोटा मोटा धन्धा करा सकते हैं, और यह सब निःस्वार्थ भाव से जाए। इसके पीछे जिसको फायदा पहुंचाया जा रहा है, उससे किसी प्रकार की भौतिक वस्तु की कामना ना करके, हम उसको समाज के लिए उपयोगी बना सकते हैं। तीसरी बात आप यदि शिक्षित हैं, तो किसी निरक्षर को शिक्षित कर सकते हैं, यह बहुत बड़ा उपकार का कार्य है यहीं आपको लिए मानव कल्याण का बहुत बड़ा कार्य है।


2.    दूसरा हम सामाजिक रुप से मानव कल्याण करने के लिए हमें एक बड़े समूह को ध्यान में रख कर कर सके हैं। किसी भी कार्य को करना होगा जिससे पूरे समाज को फायदा हो, यह कार्य किसी एक व्यक्ति के द्वारा संभव नहीं होने वाला कार्य है, इसके लिए हमें कई लोगों को अपने साथ लेकर अपने समाज या किसी दूसरे समाज अर्थात जो अपनी जाती बिरादरी के नहीं हैं, उस समाज के लिए कुछ बड़ा कार्य को किया जाए। ध्यान रखने की इसमें जो बात है, वह यह है कि कोई भी कार्य कभी छोटे स्तर से ही शुरु किया जाता है, उदाहरण के लिए हम दस लोगों का समूह बना कर अपने गांव और नगर को स्वच्छ बना सकते है, सामूहिक रूप से लोगों को स्वस्थ रहने की विधियों को सीखा सकते है, अर्थात नशा का उपयोग ना करें, नशा ना करने के क्या फायदे हैं, इसके प्रति लोगों को जागरूक कर सकते हैं, अथवा कोई ऐसी कला सिखा सकते हैं, जिससे वह समाज अपनी उन्नति कर सके, इसके माध्यम से हम कोई तकनीकी ज्ञान दे सकते है, जैसा की हमारे समाज में पहले कुछ कार्य ऐसे होते थे। जिसके लिए एक जाती निश्चित होती थी, जिसको और लोगों को भी करने के लिए तैयार कर सकते है, लोहे का बहुत सारा कार्य है, लकड़ी का कार्य हैं, या फिर मकान बनाने का कार्य है, कपड़ा धोने का कार्य व्वासाइक रूप से कर सकते है, बिजली के सामान बनाने का कार्य है, मोबाइल बनाने का कार्य है, कम्प्युटर बनाना और उसको चलाने का कार्य सीखा सकते हैं। इसके लिए जो धन खर्च होगा, प्रशिक्षण का कार्य होगा, इसके लिए जो संपन्न लोग हैं उन को अपने विश्वास में लेकर उनसे धन को दान में एकत्रित करके, जो तबक़ा बहुत ही नीचे का गरीब निर्धन है, या जो लोग बेसहारा और अभाव ग्रस्त हैं। उन को हम इस प्रकार से कुछ कार्यों से लाभ पहुंचा सकते हैं। ऐसे कार्यों के और भी बहुत से उदाहरण हैं, जिससे हम अपने स्तर पर मानव कल्याण का कार्य कर सकते हैं। इसके लिए सबसे आवश्यक वस्तु हैं हमारे अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति और मानव के कल्याण की भावना होना।


3.    तीसरे प्रकार का जो सबसे कठीन कार्य है वह है, आध्यात्मिक रूप से लोगों को फायदा पहूंचाना इसमें बहुत अधिक धन नहीं लेगेगा, इसमें हम लोगों को हमारे जो महापुरुष हैं, उनके द्वारा रचित शास्त्रों का पठन पाठन करा सकते हैं। और उसको लोग जब अपने जीवन में धारण करेंगें। तो उन को उनकी आत्मा में आनंद प्राप्त होगा, जिसके लिए उन को धन कमाने की जरूरत नहीं है, जो बुजुर्ग महिला और पुरुष है, उन को प्रशिक्षित किया जाए, उन को समाज की सेवा करने का व्रत लिया जाए। की वह अपने चारों तरफ जहां तक वह पहुंच सकते हैं, लोगों को ध्यान योग व्यायाम प्राणायाम इत्यादि का प्रचार प्रसार करें। क्योंकि यह संपूर्ण सृष्टि परमेश्वर के द्वारा बनाई गई है, और आज नहीं तो कल सभी को मरना ही होगा, उससे पहले कुछ ऐसा कार्य अवश्य करें, जिससे उन को उनके समाज द्वारा याद किया जाए, की उन्होंने समाज के जीवन के स्तर को उपर उठाने के लिए अच्छा कार्य किया है, जिसके लिए समाज हमेशा उनका ऋणी रहेगा।               


      हमारी संस्था हर प्रकार से यह कार्य करने वालों की सहायता के लिए तैयार रहती है। आप भी हमारे साथ साथ आए और अपने समाज और मानव कल्याण के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए हमारे साथ जुड़े। जिससे हम सब का कल्याण होगा, इससे ही हमारा देश आगे बढ़ेगा, किसी को भी दुःखी करना बहुत आसान है यदि किसी को आप खुश करते है, यह बहुत बड़ा कार्य है।


    हमारी संस्था विज्ञान ब्रह्मज्ञान अपने क्षेत्र वासियों का ध्यान रखते हुए कुछ महत्वपूर्ण कार्य कराने के लिए संघर्षरत है, 

1. प्रथम रामपुर घाट पर पीपा पुल के स्थान पर एक पक्का पुल बनाया जाए।

2. दूसरा कार्या एक बड़ा वैदिक विश्वविद्याय की स्थापना कराना अपने क्षेत्र और सभी युवा युवतियों को अच्छी शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए नितांत आवश्यक है।

3. तीसरा कार्य एक बड़ा सार्वजनिक विश्वस्तरिय चिकित्सालय की स्थापना करना है।

4. चौथा कार्य है, एक बड़ी मिल की स्थापना करना जिसमें लगभग 50000, लोगों को कार्य करने का अवसर प्राप्त हो। 

5. अपने क्षेत्र की पुरातन सभी मंदिरों का जीर्णोद्धार और नवीनी करण कराया जाए।    


      मनोज पाण्डेय 


 

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