👉 छोटी सी ग़लतफहमी
🔷 दो सगे भाई राजा और विजय साथ - साथ खेती करते
थे। मशीनों की भागीदारी और चीजों का व्यवसाय किया करते थे।
🔶 चालीस साल के साथ के बाद एक छोटी सी ग़लतफहमी
की वजह से उनमें पहली बार झगड़ा हो गया था झगड़ा दुश्मनी में बदल गया था। अब राजा और
विजय एक दूसरे की शक्ल भी देखना पसंद नहीं करते थे।
🔷 एक सुबह एक बढ़ई बड़े भाई से काम मांगने आया।
बड़े भाई ने कहा “हाँ, मेरे पास तुम्हारे लिए काम हैं।
🔶 उस तरफ देखो, वह
मेरा पड़ोसी है, यूँ तो वह मेरा भाई है, पिछले हफ्ते तक हमारे खेतों के बीच घास का मैदान हुआ करता था पर मेरा भाई
बुलडोजर ले आया और अब हमारे खेतों के बीच ये खाई खोद दी, जरूर
उसने मुझे परेशान करने के लिए ये सब किया है अब मुझे उसे मजा चखाना है, तुम खेत के चारों तरफ बाड़ बना दो ताकि मुझे उसकी शक्ल भी ना देखनी पड़े।"
🔷 “ठीक हैं”, बढ़ई ने कहा।
🔶 बड़े भाई ने बढ़ई को सारा सामान लाकर दे दिया
और खुद शहर चला गया, शाम को लौटा तो बढ़ई का काम देखकर भौंचक्का
रह गया, बाड़ की जगह वहां एक पुल था जो खाई को एक तरफ से
दूसरी तरफ जोड़ता था। इससे पहले की बढ़ई कुछ कहता, उसका छोटा
भाई आ गया।
🔷 छोटा भाई बोला “तुम कितने दरियादिल हो, मेरे
इतने भला बुरा कहने के बाद भी तुमने हमारे बीच ये पुल बनाया, कहते -कहते उसकी आंखें भर आईं और दोनों एक दूसरे के गले लग कर रोने लगे।
जब दोनों भाई सम्हले तो देखा कि बढ़ई जा रहा है।
🔶 रुको, रुको, रुको! ! !
🔷 मेरे पास तुम्हारे लिए और भी कई काम हैं, बड़ा
भाई बोला।
🔶 मुझे रुकना अच्छा लगता, पर
मुझे ऐसे कई पुल और बनाने हैं, बढ़ई मुसकुराकर बोला और अपनी
राह को चल दिया।
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