मानव सभ्यता सदियों से आकाश को निहारती आई है। लेकिन हबल अंतरिक्ष सूक्ष्मदर्शी ने पहली बार हमें ब्रह्मांड को वैसा देखने का अवसर दिया जैसा वह वास्तव में है। 1990 से कार्यरत यह अंतरिक्ष वेधशाला खगोल विज्ञान के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम साबित हुई है।
हबल स्पेस टेलीस्कोप (HST) एक विशाल अंतरिक्ष दूरबीन है, जिसे पृथ्वी के चारों ओर कक्षा (Earth Orbit) में स्थापित किया गया है।
इसे नासा (NASA) ने वर्ष 1990 में लॉन्च किया था ताकि पृथ्वी के वायुमंडल से परे जाकर ब्रह्मांड का अत्यंत स्पष्ट अवलोकन किया जा सके।
पृथ्वी का वायुमंडल प्रकाश को विकृत करता है, लेकिन हबल अंतरिक्ष में होने के कारण बिना किसी बाधा के दूरस्थ आकाशगंगाओं, तारों और रहस्यमय घटनाओं को देख सकता है।
हबल का आकार एक बेलनाकार ट्यूब जैसा है। इसके मुख्य भाग हैं:
यह दर्पण हबल का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, क्योंकि इसी से स्पष्ट और गहरी छवियाँ प्राप्त होती हैं।
हबल में कई उन्नत वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं, जिन्हें मुख्यतः तीन श्रेणियों में बाँटा गया है:
हबल पराबैंगनी (Ultraviolet), दृश्यमान (Visible) और निकट-अवरक्त (Near Infrared) तरंगों में अवलोकन कर सकता है।
डार्क मैटर अदृश्य होता है, लेकिन उसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव दिखाई देता है।
हबल ने प्रकाश के झुकाव (Gravitational Lensing) के माध्यम से डार्क मैटर का त्रि-आयामी नक्शा तैयार किया।
हबल की टिप्पणियों से यह सिद्ध हुआ कि ब्रह्मांड न केवल फैल रहा है, बल्कि उसका विस्तार तेजी से बढ़ रहा है।
इस रहस्यमय शक्ति को डार्क एनर्जी कहा जाता है।
हबल ने यह स्पष्ट किया कि गामा-किरण विस्फोट अक्सर उन आकाशगंगाओं में होते हैं जहाँ तीव्र तारा निर्माण होता है।
हबल से पहले वैज्ञानिक ब्रह्मांड की आयु को लेकर असमंजस में थे।
हबल के आँकड़ों से ब्रह्मांड की आयु लगभग 13.75 अरब वर्ष मानी गई।
हबल ने प्रमाणित किया कि लगभग हर बड़ी आकाशगंगा के केंद्र में सुपरमैसिव ब्लैक होल मौजूद है, जिसमें हमारी मिल्की वे भी शामिल है।
हबल अंतरिक्ष सूक्ष्मदर्शी ने मानव की ब्रह्मांडीय समझ को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।
यह केवल एक दूरबीन नहीं, बल्कि मानव जिज्ञासा और विज्ञान की विजय का प्रतीक है।
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