🚩‼️ओ३म्‼️🚩
दिनांक - - २९ दिसम्बर २०२४ ईस्वी
दिन - - रविवार
🌘 तिथि -- चतुर्दशी ( २८:०१ तक तत्पश्चात अमावस्या )
🪐 नक्षत्र - - ज्येष्ठा ( २३:२२ तक तत्पश्चात मूल )
पक्ष - - कृष्ण
मास - - पौष
ऋतु - - हेमन्त
सूर्य - - उत्तरायण
🌞 सूर्योदय - - प्रातः ७:१३ पर दिल्ली में
🌞 सूर्यास्त - - सायं १७:३४ पर
🌘 चन्द्रोदय -- ३०:४६ पर
🌘 चन्द्रास्त १५:५६ पर
सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२५
कलयुगाब्द - - ५१२५
विक्रम संवत् - -२०८१
शक संवत् - - १९४६
दयानंदाब्द - - २००
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🚩‼️ओ३म्‼️🚩
🔥आध्यात्मिक जागरण
भूत्यै जागरणमभूत्यै स्वप्नम् ।―(यजु० ३०/१७)
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जागना कल्याण के लिए है और सोना नाश के लिए है।
मनुष्य जन्मकाल से शरीर की साधना, निद्रा, नित्य आवश्यकताओं की निवृत्ति, खान-पान, व्यायाम, विश्राम आदि में अपना समय व्यतीत करता है। उसके पश्चात् पेट के धन्धे के लिए अपना समय निकालता है। फिर घर-गृहस्थी के कामों के लिए समय व्यतीत करता है। उसके पश्चात् रिश्तेदारों, मित्रों, पड़ोसियों, मुहल्लेदारों और सहव्यवसायियों के लिए सुख-दु:ख में सम्मिलित होता है। उसके अनन्तर वह आलस्य, प्रमाद, मनोरंजन और समाचार-पत्र का शिकार हो जाता है। ये पाँच काम तो संसार का प्राय: प्रत्येक व्यक्ति करता ही है। छठा काम, ईश्वर-भक्ति, धर्मग्रन्थों का अध्ययन और सत्संग करने वाले संसार में थोड़े व्यक्ति हैं। यही अध्यात्म-जागरण का मार्ग है।
प्रत्येक मनुष्य जीवन-भर उपरोक्त पाँचों कामों में अपना समय व्यतीत कर देता है। जितनी आयु तक वह ये काम करता है वह आयु सांसारिक आयु होती है। पारमार्थिक आयु तभी से समझनी चाहिए जब से व्यक्ति में आध्यात्मिक जागरण आ जाए। यही वास्तविक आयु है क्योंकि जीवन का लक्ष्य आत्म-साक्षात्कार और परमात्म-साक्षात्कार करना है।
महाराज विक्रमादित्य कहीं जा रहे थे। एक अत्यन्त वृद्ध पुरुष को देखकर उन्होंने पूछा, 'महाशय ! आपकी आयु कितनी है?'
वृद्ध ने अपनी श्वेत दाढ़ी हिलाते हुए कहा, 'श्रीमान जी ! केवल चार वर्ष' ।
यह सुनकर राजा को बड़ा क्रोध आया। वह बोला, 'तुम्हें शर्म आनी चाहिए। इतने वृद्ध होकर भी झूठ बोलते हो। तुम्हें अस्सी वर्ष से कम कौन कहेगा?'
वृद्ध बोला, 'श्रीमान्, आप ठीक कहते हैं। किंतु इन अस्सी वर्षों में से 76 वर्ष तक तो मैं पशु की तरह अपने कुटुम्ब का भार वहन करता रहा। अपने कल्याण की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। अत: वह तो पशु-जीवन था। अभी चार वर्ष से ही मैंने आत्म-कल्याण की ओर ध्यान दिया है। इससे मेरे मनुष्य जीवन की आयु चार वर्ष की है। और वही मैंने आपको बताई है।
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🕉️🚩आज का वेद मन्त्र,🚩🕉️
🔥 ओ३म् सप्त तेऽअग्ने समिध: सप्त जिह्वा: सप्तऽऋषय: सप्त धाम प्रियाणि।
सप्त होत्रा: सप्तधा त्वा यजन्ति सप्त योनीरापृणस्व घृतेन स्वाहा॥ यजुर्वेद १७-७९॥
🌷हे तेजस्वी मनुष्य, सात प्राण (प्राण, अपान, समान, उदान व्यान, देवदत्त और धनंजय) तुम्हारी समिधायें हैं। सात जिव्हा ( काली, कराली आदि) तुम्हारी ज्ञान अग्नि की ज्वालाएं हैं। सात ऋषि (पांच ज्ञानेंद्रियां, मन और बुद्धि) तुम्हारे ज्ञान के स्रोत हैं। सात (जन्म, नाम, स्थान, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) तुम्हारे प्रिय धाम हैं। सात (होत,प्रशस्त, आदि) तुम्हारे यजन्ति हैं, जो सात प्रकार (अग्निस्तोम,सस अतिअग्निस्तोम आदि) द्वारा होम करते हैं। तुम इन स्थानों को अपने ज्ञान ओर त्याग द्वारा भरो।
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🔥विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇
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🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏
(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) 🔮🚨💧🚨 🔮
ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये प्रहरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- पञ्चर्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२५ ) सृष्ट्यब्दे】【 एकाशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८१) वैक्रमाब्दे 】 【 द्विशतीतमे ( २००) दयानन्दाब्दे, काल -संवत्सरे, रवि- उत्तरायणे , हेमन्त -ऋतौ, पौष - मासे, कृष्ण पक्षे, चतुर्दश्यां
तिथौ,
ज्येष्ठा नक्षत्रे,रविवासरे
, शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर गते, भारतवर्षे ढनभरतखंडे...प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे
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