जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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प्राचीन गुरुकुल शिक्षा विधि | भारतीय शिक्षा प्रणाली की पुनर्स्थापना

 
Ancient Indian Gurukul education system in natural environment

 

🔱 प्राचीन गुरुकुल शिक्षा विधि की पुनर्स्थापना

✨ प्रस्तावना (Intro)

प्राचीन भारत की गुरुकुल शिक्षा प्रणाली केवल पढ़ाई की पद्धति नहीं थी, बल्कि पूर्ण मानव निर्माण की प्रक्रिया थी। यह शिक्षा शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा—चारों का समन्वित विकास करती थी। आज जब आधुनिक शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित हो गई है, तब गुरुकुल शिक्षा की पुनर्स्थापना राष्ट्र के नैतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए अनिवार्य हो गई है।


❓ प्रश्न–उत्तर रूप में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली

❓ गुरुकुल शिक्षा प्रणाली क्या होती है?

उत्तर:
घर में न रहकर गुरु के अधीन रहकर, ब्रह्मचर्यपूर्वक, त्याग, तपस्या, संयम और अनुशासन के साथ विद्या अर्जन करना ही गुरुकुल शिक्षा प्रणाली कहलाती है।


❓ ब्रह्मचारी या ब्रह्मचारिणी किसे कहते हैं?

उत्तर:
जो आचार्य कुल में रहकर शरीर की शुद्धता, चित्त की रक्षा तथा विद्या प्राप्ति के लिए सतत प्रयत्न करता है, वही ब्रह्मचारी या ब्रह्मचारिणी कहलाता है।


❓ गुरुकुल में प्रवेश की आयु क्या होती थी?

उत्तर:
सामान्यतः 6 वर्ष की आयु में प्रवेश होता था, किंतु अपवाद स्वरूप अधिक आयु में भी प्रवेश की व्यवस्था थी।


❓ पारिवारिक स्थिति का कोई भेद था?

उत्तर:
नहीं। गुरुकुल में राजा-रंक, अमीर-गरीब, आदिवासी-अछूत—सभी को समान अधिकार से प्रवेश मिलता था। यह पूर्णतः समतावादी व्यवस्था थी।


❓ गुरुकुलीय जीवन में भोजन व वस्त्र कैसे होते थे?

उत्तर:
भोजन शुद्ध, सात्त्विक और सीमित होता था। वस्त्र सरल, सभ्य और शालीन होते थे, जिससे अहंकार का नाश हो।


❓ गुरुकुलों में कौन-कौन से विषय पढ़ाए जाते थे?

उत्तर:
गुरुकुल शिक्षा बहुआयामी थी, जिसमें शामिल थे—

  • वेद, उपनिषद, दर्शन, व्याकरण
  • गणित, भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान
  • चिकित्सा, खगोल, भूगोल, अन्तरिक्ष
  • कृषि, शिल्प, कला, संगीत
  • योग, यज्ञ, युद्ध एवं नीति शास्त्र
  • राजनीति, अर्थशास्त्र, न्याय, विमान विद्या

👉 अर्थात् भौतिक + आध्यात्मिक दोनों उन्नति।


❓ दैनिक समय-सारिणी कैसी होती थी?

Gurukul daily routine with yoga and yajna


उत्तर:

  • ब्रह्ममुहूर्त में जागरण
  • ऊषापान (तांबे के पात्र का जल)
  • व्यायाम, स्नान, संध्या, प्राणायाम
  • अग्निहोत्र (यज्ञ)
  • प्राकृतिक वातावरण में अध्ययन
  • सूर्यास्त पर संध्या व रात्रि विश्राम

👉 भोजन केवल दिन में दो बार


❓ शिक्षा शुल्क क्या था?

उत्तर:
गुरुकुल शिक्षा पूर्णतः निशुल्क थी।


❓ गुरुकुलों का खर्च कैसे चलता था?

उत्तर:

  • ग्रामवासियों के दान से
  • राज्य के संरक्षण से

❓ गुरुकुल कहाँ स्थापित होते थे?

उत्तर:
ग्रामों से दूर, अरण्य (वन) में—जहाँ प्रकृति स्वयं गुरु बनती थी।


❓ क्या बालिकाओं के भी गुरुकुल होते थे?

Gurukul education equality for all castes


उत्तर:
हाँ। बालकों और बालिकाओं के अलग-अलग गुरुकुल होते थे, जिनके बीच न्यूनतम 12 कोस की दूरी रखी जाती थी।


❓ शिक्षा का माध्यम क्या था?

उत्तर:
गुरुकुलों का माध्यम संस्कृत था—और वही रहेगा।


❓ भारत में गुरुकुल कितने पुराने हैं?

उत्तर:
गुरुकुल प्रणाली आदिकालीन है—मानव सभ्यता के आरम्भ से।


❓ प्राचीन भारत में कितने गुरुकुल थे?

उत्तर:
औसतन हर गाँव में 2 गुरुकुल मानें तो लगभग
👉 36 लाख गुरुकुल सम्पूर्ण आर्यावर्त में विद्यमान थे।


❓ प्रमुख प्राचीन विश्वविद्यालय?

उत्तर:
नालंदा, तक्षशिला, पाटलिपुत्र, वल्लभीपुर आदि।


❓ आधुनिक काल में पहला गुरुकुल?

उत्तर:
1902 ई., कांगड़ी (हरिद्वार) —
स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती जी द्वारा।


❓ राष्ट्र की खोई गरिमा कैसे लौटेगी?

उत्तर:
👉 गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की पुनर्स्थापना से।


❓ गुरुकुल से शिक्षित महान विभूतियाँ

उत्तर:
राम, कृष्ण, कपिल, कणाद, पतंजलि, धन्वंतरि, गार्गी, मैत्रेयी, अर्जुन, द्रोण, परशुराम, द्रौपदी आदि।


🕉️ सूक्ति (धर्म-रक्षा हेतु)

“विद्या ददाति विनयम्, विनयाद् याति पात्रताम्।”
अर्थ: विद्या से विनय आता है, और विनय से पात्रता।



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