कैसे ज्ञान ही मानव जीवन को दुःख, मृत्यु और अज्ञान से बचाता है
जीवन अपने नियमों और शक्तियों के अनुसार चलता है। ये नियम अत्यंत मजबूत और अकाट्य हैं। इस ब्रह्मांड में दुःख, पीड़ा, कष्ट और मृत्यु का अस्तित्व अटल है। केवल वही लोग इन कठिनाइयों से बच सकते हैं, जिनके पास यथार्थ ज्ञान है और जो तीनों कालों – भूत, वर्तमान और भविष्य – को समझने की क्षमता रखते हैं।
ऐसे व्यक्तियों की संख्या अत्यंत कम है। उन्हें हम उंगलियों पर गिन सकते हैं। विज्ञान का नियम यह है कि विलय और विलायक का होना आवश्यक है। जिनकी संख्या कम होती है, वे विलय हो जाते हैं, और जिनकी संख्या अधिक होती है, वे विलायक बन जाते हैं। इसका अर्थ यह है कि कम ज्ञान वाले लोग अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं।
आज के समय में अज्ञानियों की संख्या अत्यधिक है। यह दिखाता है कि अज्ञान ही अधिकांश लोगों के दुःख और पीड़ा का मूल कारण है। जो लोग दुःख भोग रहे हैं, मर रहे हैं, या सड़कर समाप्त हो रहे हैं, यह उनके कर्मों और ग्रह-नक्षत्रों के प्रभाव के कारण है।
अज्ञान के कारण लोग भ्रमित हैं। उन्हें जीवन, मृत्यु और अपने अस्तित्व के बारे में स्पष्ट समझ नहीं है। इसी भ्रम के कारण लोग जिंदगी को संघर्ष और मजबूरी समझकर जी रहे हैं।
विभिन्न समाजों में देखा गया है कि अज्ञान का प्रभाव पीढ़ी दर पीढ़ी फैलता है। उदाहरण के लिए, कई लोग अपनी संपत्ति, स्वास्थ्य, और समय की अवहेलना करते हैं क्योंकि उन्हें जीवन के वास्तविक उद्देश्य और नियमों का ज्ञान नहीं होता। इसी कारण जीवन में मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाई और व्यक्तिगत असंतोष बढ़ते हैं।
वास्तविक ज्ञान का अर्थ है “तीन काल दर्शी होना”, अर्थात:
यह ज्ञान ईश्वर, जीव, प्रकृति, और ब्रह्मज्ञान को जानने वाला व्यक्ति प्रदान करता है। ऐसे ज्ञानवान लोग अत्यंत दुर्लभ हैं।
अगर हम ऐसे ज्ञानवान व्यक्तियों को बढ़ाने के लिए प्रयास नहीं करेंगे, तो मानवता का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
दुःख और पीड़ा से मुक्ति:
ज्ञानवान व्यक्ति अपनी इच्छाओं और कृत्यों को समझता है। वह अनावश्यक इच्छाओं और लालच में फंसकर दुःख नहीं भोगता।
समाज और परिवार में नेतृत्व:
ज्ञान के कारण व्यक्ति समाज में समानता, न्याय और विवेक का पालन करता है। इसके माध्यम से वह अपने परिवार और समुदाय के लिए मूल्यवान योगदान देता है।
आत्म-नियंत्रण और मानसिक शांति:
ज्ञान व्यक्ति को अपने मन और भावनाओं पर नियंत्रण देना सिखाता है। यह सत्य, अहिंसा और संयम के सिद्धांतों को अपनाने में मदद करता है।
भविष्य की सुरक्षा:
ज्ञानवान लोग भविष्य की समस्याओं का पूर्वानुमान और समाधान कर सकते हैं। वे अपने कर्मों और निर्णयों से भविष्य को बेहतर बनाते हैं।
आज की दुनिया में भी ज्ञान की कमी के कारण लोग अत्यधिक तनाव, मानसिक रोग और आर्थिक समस्याओं से पीड़ित हैं। उदाहरण के लिए:
इसलिए, ज्ञान का महत्व समय के साथ और भी बढ़ गया है।
शिक्षा और साधना:
बच्चों और युवाओं को केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन और ब्रह्मज्ञान का भी प्रशिक्षण देना चाहिए।
अनुभव और मार्गदर्शन:
अनुभवी और ज्ञानी व्यक्तियों से सीखने के अवसर बढ़ाने चाहिए।
सामाजिक संरचना:
समाज को ऐसे ढंग से बनाना चाहिए कि ज्ञान की संख्या बढ़े और अज्ञान घटे।
ज्ञान ही वह प्रकाश है, जो अज्ञान और दुःख के अंधकार को मिटा सकता है। ज्ञान के बिना जीवन केवल संघर्ष, पीड़ा और भ्रम में गुजरता है। इसलिए हमें ज्ञान को अपनाना चाहिए, इसे फैलाना चाहिए, और ज्ञानवान व्यक्तियों का सम्मान करना चाहिए।
Moral / शिक्षा:
अगर चाहो तो मैं इसे Blogger-ready HTML में भी बदल दूँ, जिसमें Heading Tags, Bold, Italic, Paragraphs और Image Tags पहले से सेट हों। इससे Google Indexing और SEO-friendly भी हो जाएगा।
क्या मैं वही कर दूँ?
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