👉 बालू के कण
🔷 सीपी के पेट में बालू का एक कण घुस जाता है।
उस कण के ऊपर सीपी के शरीर का रस लिपटता जाता है और वह बढ़ते-बढ़ते एक चमकते हुये कीमती
मोती के रूप में प्रस्तुत हो जाता है। यो बालू के एक कण की कुछ कीमत नहीं, पर
सीपी जब उसे अपने उदर में धारण कर अपने जीवन रस से सींचने लगती हैं तो वह तुच्छ रज
कण एक मूल्यवान पदार्थ बनता है। उच्च नैतिक आदर्श भी ऐसे ही बालू के कण हैं जो यदि
मनुष्य के हृदय में गहराई तक प्रवेश कर जाये तो एक तुच्छ व्यक्ति को महापुरुष,
ऋषि और देवता के रुपये प्रस्तुत कर सकते है।
👉 जैसी करनी वैसी भरनी
🔷 जो लोग भले होते हैं, वे
तो किसी प्रकार उबर आते है पर कुटिल चाल चलने वाले अन्तत : स्वयं गिरते हैं। ऐसे
गीदड़ वेशधारी अनेक व्यक्ति समाज में बैठे हैं।
🔶 एक गीदड़ एक दिन गड्ढे में गिर गया। बहुत उछल-कूद
की किन्तु बाहर न निकल सका। अन्त में हताश होकर सोचने लगा कि अब इसी गड्ढे में मेरा
अन्त हो जाना है। तभी एक बकरी को मिमियाते सुना। तत्काल ही गीदड़ की कुटिलता जाग
उठी। वह बकरी से बोला-' बहिन बकरी। यहाँ अन्दर खूब हरी-हरी घास और
मीठा-मीठा पानी है। आओ जी भरकर खाओ और पानी पियो। " बकरी उसकी लुभावनी बातों
में आकर, गड्ढे में कूद गयी।
🔷 चालाक गीदड़ बकरी की पीठ पर चढ़कर गड्ढे से
बाहर कूद गया और हँसकर बोला-"तुम बड़ी बेवकूफ हो, मेरी
जगह खुद मरने गड्ढे में आ गई हो। " बकरी बड़े सरल भाव से बोली-"गीदड़ भाई,
मेरी उपयोगिता वश कोई न कोई मुझे निकाल ही लेगा किन्तु तुम अपने ही लक्षणों
के कारण विनाश के बीज बो लोगे।
🔶 थोड़ी देर में मालिक ढूँढ़ता हुआ बकरी को
निकाल ले गया। रास्ते में जा रही बकरी ने देखा वही गीदड़ किसी के तीर से घायल हुआ
झाड़ी में कराह रहा है।
0 टिप्पणियाँ